अमित झा एक ऐसे ही शब्दसाधक हैं जिन्होंने अनेक पात्रों को शब्द दिए हैं, उन्हें आवाज दी है।
3.
इसी नाते बहुत कम हुए हैं ऐसे शब्दसाधक जिनके नितांत सरल सहज उद्गारों को बड़ी संजीदगी से पढ़ा गया है, जिनका कहा लिखा हजारों हजार सालों के अंतराल को लांघता हुआ आने वाले समयों में भी अपनी समूची असाधारणता के साथ जिन्दा रहा है।