इस आवेदन पर न्यायालय दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन की डिक्री पारित कर देगी।
2.
दांपत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन, न्यायिक पृथक्करण और विवाह तथा तलाक की नास्तित्वता संबंधी नियम भी इस अधिनियम द्वारा निर्धारित किए गए।
3.
इस डिक्री का यही असर होता है कि दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन की डिक्री पारित होने पर भी यदि कोई उस की पालना न करे तो इस पालना न करने के आधार पर तलाक प्राप्त किया जा सकता है।
4.
विवाह में रहते हुए पति पत्नी के अलग अलग रहने में कोई बाधा नहीं है लेकिन पति या पत्नी में से कोई भी जान बूझ कर अलग रह रहा हो और दाम्पत्य के दायित्वों का निर्वाह नहीं कर रहा हो तो दूसरा उस के विरुद्ध धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।