जयदेव ने ‘गीत गोविन्द ' के माध्यम से उस समय के समाज को, जो शंकराचार्य के सिद्धांत के अनुरूप आत्मा और मायावाद में उलझा हुआ था, राधाकृष्ण की रसयुक्त लीलाओं की भावुकता और सरसता से जन-जन के हृदय को आनंदविभोर किया।
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कहानी खुशकिस्मत (मृदुला गर्ग), गुलाबी ओढ़नी(स्वाति तिवारी),एक बदमजा लड़की(कृष्णा अग्निहोत्री), करोड़पति(कमल कुमार), भेड़िए(लता शर्मा), एक सांवली सी परछाई(मनीषा कुलश्रेष्ठ), देह के पार(जयश्री राय) तथा विकलांक श्रद्धा(ज्योति कुमारी) कहानियों में बहुत कुछ है जो साहित्य के नवसिखियों को कथा की सरसता से अवगत कराएगा।
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जयदेव ने ‘ गीत गोविन्द ' के माध्यम से उस समय के समाज को, जो शंकराचार्य के सिद्धांत के अनुरूप आत्मा और मायावाद में उलझा हुआ था, राधाकृष्ण की रसयुक्त लीलाओं की भावुकता और सरसता से जन-जन के हृदय को आनंदविभोर किया।
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बातचीत से पता चला कि जयन्तीलाल जी बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार है और बाँसुरी से शुरू कर विभिन्न नए पुराने वाद्य जैसे बाँसुरी, मैन्डोलिन, रवाब, गिटार बहुत सरसता से बजाते है इसीलिए जिन फ़िल्मी गीतों में उन्होनें बजाया वो गीत भी लोकप्रिय है-
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आलोचना के किसी आलेख में ऐसे शब्दों के बाधाहीन प्रवाह, जो कि स्वयं में ही कविता मालुम पड़ने लग जाए और एक काव्य की ही भांति सरसता से विषय को आपके भीतर बड़ी ही सहजता से प्रवाहित कर दे यह आलोचना की नीरसता के लिए बहुत ही अच्छा संकेत है...
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वहीं उच्च माध्यमिक स्तर पर हिन्दी आधार व हिन्दी साहित्य ऐच्छिक विषय का पैटर्न एक जैसा होने से हिन्दी साहित्य का विद्यार्थी उस विविधता और सरसता से वंचित रहता है जो अन्य विषय के विद्यार्थियों को सुलभ है या एन. सी. ई. आर. टी के पाठ्यक्रम से पहले सुलभ थी।
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सत्तर के दशक की फिल्म ' किनारा ' में यही बात गुलजार कह गए हैं नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे और इतने सालों बाद उसी सरसता से यही बात कही है गीतकार शाहीन इकबाल ने अभिजीत के इस एलबम लमहे में ।
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कहानी खुशकिस्मत (मृदुला गर्ग), गुलाबी ओढ़नी (स्वाति तिवारी), एक बदमजा लड़की (कृष्णा अग्निहोत्री), करोड़पति (कमल कुमार), भेड़िए (लता शर्मा), एक सांवली सी परछाई (मनीषा कुलश्रेष्ठ), देह के पार (जयश्री राय) तथा विकलांक श्रद्धा (ज्योति कुमारी) कहानियों में बहुत कुछ है जो साहित्य के नवसिखियों को कथा की सरसता से अवगत कराएगा।
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बातचीत से पता चला कि जयन्तीलाल जी बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार है और बाँसुरी से शुरू कर विभिन्न नए पुराने वाद्य जैसे बाँसुरी, मैन्डोलिन, रवाब, गिटार बहुत सरसता से बजाते है इसीलिए जिन फ़िल्मी गीतों में उन्होनें बजाया वो गीत भी लोकप्रिय है-मैन्डोलिन पर गीत-तुझे देखा तो ये जाना सनमरवाब पर-चप्पा चप्पा चरखा चलेबताया कि विभिन्न वाद्य सीख लेते है जैसे संगीतकार उत्तम सिंह के कहने पर रवाब बजाना सीखा।
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क्षणिकता के इस सौंदर्य को, सरसता से जो जीना हो जितनी भी मिली, उस जीवनामृत को सहजता से जो पीना हो तो ज़रा रफ़्तार धीमी हो वाणी ज़रा भावभीनी हो ईशनाम के संकीर्तन से गूंजती हो हवाएं रामनाम का संग्रह कर ले, सूरज डूबा जाए अस्ताचलगामी सूर्य की मनोहारी छवि भर ले अपने दामन में, अब विदा हुए रवि लो, अब तो-शाम हो चली है जिंदगी कितनी निर्मोही-औ ' छली है मृत्यु के कगार पर अकेला छोड़ आती है किसी अनचिन्हे क्षण मुँह मोड़ जाती है ; कहाँ से चले थे..