| 31. | और मुख पर स्निग्ध अंतर की झलकती क्रांति
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| 32. | साथ में वो भी स्निग्ध व पवित्र हँसी।
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| 33. | स्निग्ध शीतल चाँदनी की अमृत भरी बरसात है ,
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| 34. | मन में करुणा का स्निग्ध प्रदीप जलाए ।
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| 35. | रेशमसा स्निग्ध रूप धर जाती है जिंदगी . ......
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| 36. | गुण- गुरु , स्निग्ध, रस- मधुर, तिक्त , कषाय
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| 37. | गुण- गुरु , स्निग्ध, रस- मधुर, तिक्त , कषाय
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| 38. | स्निग्ध दृष्टि , ममतामय आनन्, तुम जग जननी लगती थीं.
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| 39. | गीता का स्वर तरंग जल स्वर स्निग्ध मधुर ।
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| 40. | नागार्जुन सराय प्रांगण -साफ़ सुथरा और स्निग्ध
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